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‘पीएम अनुभवहीन’: हर मोर्चे पर नाकाम नरेन्द्र मोदी, रामलीला मैदान में गरजे केजरीवाल

ByNewuttarakhand

Jun 11, 2023

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सुप्रीम कोर्ट के आदेश को खारिज करने के लिए जो अध्यादेश लाया है, वह सही है या गलत? इसको समझाने के लिए उन्होंने नेता ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को बुलाया और उन्होंने इसे बारीकी से समझाते हुए इसे केंद्र सरकार का गलत निर्णय करार दिया है। लिहाजा आज रामलीला मैदान से संविधान को बचाने का आंदोलन शुरू हो रहा है और इस मामले में हमें बहुत जल्दी सफलता मिलेगी।

केजरीवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को दिल्ली के लोगों के हक में फैसला दिया, मगर 19 मई को केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया। इस तरह देश के अंदर जनतंत्र खत्म हो रहा है, जबकि सप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जनता सुप्रीम है और केंद्र सरकार का अध्यादेश कहता है कि दिल्ली की जनता नहीं है, बल्कि उपराज्यपाल सुप्रीम है। इस तरह केंद्र सरकार ने दिल्ली की जनता का अपमान किया, जिसे वह बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस अध्यादेश को हम खारिज और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करवाकर रहेंगे।

पूर्व केंद्रीय मंत्री व राज्यसभा में निर्दलीय सदस्य कपिल सिब्बल ने दिल्ली सरकार से अधिकार छीनने के केंद्र सरकार के निर्णय को गलत ठहराया था। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार नौकरशाह दिल्ली सरकार के प्रति जवाबदेह है, मगर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वीकार नहीं किया और वह अध्यादेश ले आई। इतना ही नहीं, सेवाओं के मामलों के लिए समिति का गठन किया और समिति में नौकरशाही मुख्यमंत्री से अधिक शक्ति का प्रयोग करेगी। इसके अलावा उपराज्यपाल को अधिकार दिए गए।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि देश और लोकतंत्र खतरे में आ चुका है। इस कारण यह रैली की है। लिहाजा अब जनता को जागना होगा और देश को बचाने के लिए 140 करोड़ जनता को सामने आना पड़ेगा। क्योंकि वर्ष 2024 में मोदी चुनाव जीत गए तो उसके बाद फिर चुनाव नहीं होगा। नरेंद्र मोदी ना रहकर नरेंद्र पुतिन बन जाएंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब पूर्ण राज्य होने के बावजूद उन्हें केंद्र सरकार कार्य नहीं करने दे रही है। आप नेता व राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ पूरे देश में आंदोलन को शुरू करने की जरूरत है, क्योंकि दिल्ली के दो करोड़ लोगों को अधिकार छीनना मंजूर नहीं है। राज्यसभा में जब ये बिल आएगा तो सभी विपक्षी दल मिलकर इस बिल को गिराने का काम करेंगे।

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